Moya Robot vs Protocol One Alpha: कौन सा Humanoid Robot ज्यादा एडवांस्ड है? पूरी तुलना (2026)

लेखक: अमल कुमार
मैकेनिकल इंजीनियर (AKTU लखनऊ, 2025 पास आउट)

Moya Robot vs Protocol One Alpha: नमस्कार दोस्तों, जैसा की आप जानते है की मैंने (Amal Kumar) Aktu लखनऊ से Mechanical Engineering की है और चार साल बाद जब मैं पास आउट हुआ तो मुझे लगा की क्यों न कुछ स्टडी किया जाए तभी मैंने देखा की धीरे धीरे रोबाटिक्स की चर्चा बढ़ रही है तो उसके बाद मैंने इस पर रिसर्च की तब मुझे लगा की इंसानों का भविष्य बहुत खतरे मे है। क्योंकि दो ऐसे Advance and new technology पर बेस्ड हुमएनॉइड रोबोट बनाए गए है जो हूबहू इंसानों की तरह दिखते है और उन्ही की तरह काम करते है।

तो आज मैं आपको उसके अंदर की मैकेनिज्म को समझने की कोशिश करता हूँ। हाल के सालों में दो रोबोट काफी चर्चा में रहे हैं – चीन का मोया (Moya) और पोलैंड का क्लोन अल्फा (Clone Alpha) । दोनों ही ह्यूमनॉइड हैं, लेकिन दोनों का अप्रोच एकदम अलग है।

एक तरफ मोया है जो इलेक्ट्रिक मोटर्स और टेंडन सिस्टम से चलता है, दूसरी तरफ क्लोन अल्फा है जो आर्टिफिशियल मसल्स और पानी वाले हाइड्रोलिक सिस्टम पर आधारित है। आज मैं दोनों को मैकेनिकल इंजीनियरिंग की नजर से विस्तार से समझाने की कोशिश करूंगा।

Moya Robot vs Protocol One Alpha कौन सा Humanoid Robot ज्यादा एडवांस्ड है पूरी तुलना (2026)

मोया रोबोट: चीन का सोशल ह्यूमनॉइड?

दोस्तों आपको बात दें की मोया को शंघाई स्थित कंपनी DroidUp ने 2026 में पेश किया। यह औद्योगिक रोबोट नहीं है। कंपनी ने इसे सोशल इंटरैक्शन के लिए बनाया है – जैसे बुजुर्गों की देखभाल, स्कूल में टीचिंग, होटल या ऑफिस में रिसेप्शन और लोगों से बातचीत। और इसे दुनिया का Biometric कहा जा रहा है।

Specification of Moya Robot:

दोस्तों सबसे पहले बात करते है रोबोट की ऊंचाई की तो यह 1.65m और वजन सिर्फ 32 किलोग्राम। इतने बड़े रोबोट का वजन इतना कम होना अपने आप में बड़ी बात है। ज्यादातर ह्यूमनॉइड 50 से 80 किलो तक के होते हैं। हल्का वजन होने से ये ज्यादा सुरक्षित लगता है और बैटरी भी बेहतर चलती है।

इसका स्केलेटन Walker-3 प्लेटफॉर्म पर बना है। कंपनी ने इसे हल्के एलॉय और कंपोजिट मटेरियल से तैयार किया है। और ऊपर से सिलिकॉन स्किन चढ़ी हुई है और साथ ही सिलिकॉन स्किन के नीचे थर्मल रेग्युलेशन सिस्टम लगा है जो शरीर का तापमान 32 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रखता है। यानी छूने पर ठंडा लोहा नहीं लगता, बल्कि हल्का गरम लगता है जैसे किसी इंसान को छू रहे हों।

Moya Robot

एक्चुएशन सिस्टम:

मोया हाइड्रोलिक रोबोट नहीं है। इसमें टेंडन-ड्रिवन सिस्टम लगाया गया है। इलेक्ट्रिक सर्वो मोटर से केबल (टेंडन) खिंचती है और जॉइंट मूव करते हैं। ये सिस्टम इंसान की मांसपेशियों और नसों की नकल करता है।

इसके फायदे साफ हैं – वजन कम रहता है, आवाज लगभग नहीं होती, बिजली कम खर्च होती है और हरकतें काफी नॉचुरल लगती हैं। कंपनी का दावा है कि इसकी चाल 92 प्रतिशत इंसान जैसी है। स्पीड ज्यादा नहीं है, करीब 3 किलोमीटर प्रति घंटा, लेकिन स्थिर और सुंदर चाल है।

चेहरा, सेंसर और AI:

चेहरे में छोटे-छोटे मोटर्स लगे हैं जो मुस्कान, पलक झपकना, भौंहें उठाना और सिर हिलाना जैसे भाव पैदा करते हैं। आँखों में कैमरे लगे हैं जिससे ये आँख से आँख मिलाकर बात कर सकता है। सेंसर में RGB कैमरा, स्टीरियो कैमरा, IMU, टेम्परेचर सेंसर और फोर्स सेंसर शामिल हैं।

AI सिस्टम एम्बॉडिड टाइप का है। रोबोट देखता है, समझता है और फिर एक्शन लेता है। हाथ भी इंसान जैसे बनाए गए हैं, लेकिन भारी सामान उठाने लायक नहीं हैं। पेलोड कम है, इसलिए फैक्ट्री या वेयरहाउस के काम के लिए ये सही नहीं है।

क्लोन अल्फा: पोलैंड का ह्यूमनॉइड रोबोट?

भाई अब बात करते हैं क्लोन अल्फा की। यह पोलैंड की कंपनी Clone Robotics का प्रोजेक्ट है। इसे Protoclone भी कहा जाता है। यह दुनिया के उन रोबोट्स में से एक है जो बाकी सबसे अलग रास्ते पर चल रहा है।

आप तो जानते है की ज्यादातर कंपनियां इलेक्ट्रिक मोटर्स यूज करती हैं, लेकिन क्लोन अल्फा में आर्टिफिशियल मसल्स लगाई गई हैं। कंपनी ने इसे Myofiber तकनीक नाम दिया है।

Basic Specification:

भाई अब बात करते है इसकी ऊंचाई की तो यह 170 cm और वजन 60kg है और अंदर से पूरी तरह इंसान जैसा बनाया गया है। इंसान के शरीर में 206 हड्डियां होती हैं, तो इसमें भी 206 आर्टिफिशियल हड्डियां लगाई गई हैं। ये हड्डियां पॉलीमर कंपोजिट से बनी हैं।

मसल्स की संख्या 1000 से ज्यादा है। ये मसल्स इंसान की मांसपेशियों की तरह सिकुड़ती और फैलती हैं। कंपनी का दावा है कि एक छोटी सी 3 ग्राम की मायोफाइबर करीब 1 किलो तक का जोर लगा सकती है और 50 मिलीसेकंड से भी कम समय में सिकुड़ जाती है।

हाइड्रोलिक सिस्टम:

क्लोन अल्फा हाइड्रोलिक रोबोट है, लेकिन तेल से नहीं चलता। ये पानी से चलता है। सिस्टम कुछ इस तरह काम करता है – पानी का रिजर्वायर, 500 वाट का पंप, प्रेशर लाइन्स, आर्टिफिशियल मसल और फिर जॉइंट मूवमेंट। पंप करीब 100 PSI प्रेशर बनाए रखता है।

ये सिस्टम इंसान के मसल-टेंडन-बोन सिस्टम की नकल करता है। आर्टिफिशियल मसल से टेंडन जुड़ी होती है, टेंडन हड्डी से जुड़ी होती है और फिर जॉइंट घूमता है। कंधे, कलाई, उंगलियां, कूल्हे और घुटने लगभग इंसान की एनाटॉमी की तरह बनाए गए हैं।

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सेंसर और कंट्रोल सिस्टम

सेंसर की बात करें तो इसमें 4 डेप्थ कैमरे, 70 इनर्शियल सेंसर, 320 प्रेशर सेंसर और IMU लगे हैं। कुल मिलाकर 500 से ज्यादा सेंसर और कंपोनेंट्स हैं। ये सेंसर मसल की प्रेशर और जॉइंट की पोजीशन को लगातार मॉनिटर करते हैं।

कंट्रोल सिस्टम भी इंसान के नर्वस सिस्टम की तरह बनाया गया है। इलेक्ट्रिकल वायरिंग से वाल्व कंट्रोलर और प्रेशर कंट्रोलर को सिग्नल जाता है, फिर AI कंप्यूटर मसल को एक्टिवेट करता है। दिमाग के तौर पर इसमें NVIDIA Jetson Thor लगाया गया है।

Protocol One Alpha

Moya vs Clone Alpha: मैकेनिकल तुलना?

तुलना का आधार (Feature)मोया (Moya)क्लोन अल्फा (Clone Alpha)
एक्चुएटर सिस्टम• इलेक्ट्रिक सर्वो मोटर और टेंडन सिस्टम।
• सिंपल, हल्का और कम मेंटेनेंस वाला डिज़ाइन।
• पानी से चलने वाली आर्टिफिशियल मसल्स (Hydraulics/Pneumatics)।
• अधिक रियलिस्टिक लेकिन काफी कॉम्प्लेक्स।
वजन और सुरक्षा• वजन: 32 किलो (हल्का)।
• अधिक सुरक्षित और एनर्जी एफिशिएंट।
• वजन: ~60 किलो (इंसान के करीब)।
• मेंटेनेंस अधिक और लीकेज (leakage) का खतरा।
स्केलेटन एवं चाल• लाइटवेट फ्रेम स्केलेटन।
• 92% इंसान जैसी चाल का दावा।
• 206 हड्डियों वाली पूरी बायोमिमेटिक स्केलेटन।
• अधिक मस्कुलर व नेचुरल हरकतें, लेकिन स्व-वजन पर स्टेबल वॉकिंग सीमित।
उपयोग क्षेत्र• सोशल इंटरैक्शन, हेल्थकेयर, एल्डर केयर और एजुकेशन।• रिसर्च, बायोमिमेटिक डेवलपमेंट और एडवांस एक्सपेरिमेंट।

दोनों के फायदे और नुकसान क्या क्या है?

मोया के फायदे:

  • बहुत हल्का (32 किलो)
  • मेंटनेंस आसान
  • आवाज कम
  • छूने पर गरम लगता है
  • प्रैक्टिकल डिप्लॉयमेंट के लिए बेहतर

मोया के नुकसान:

  • पेलोड बहुत कम
  • भारी काम नहीं कर सकता
  • अभी शुरुआती प्रोडक्शन में है

क्लोन अल्फा के फायदे:

  • हरकतें बहुत इंसान जैसी
  • पूरी एनाटॉमी ह्यूमन जैसी
  • उच्च डेक्सटेरिटी
  • बायोमिमेटिक रिसर्च के लिए बेहतरीन

क्लोन अल्फा के नुकसान:

  • हाइड्रोलिक सिस्टम कॉम्प्लेक्स
  • लीकेज और मेंटेनेंस की समस्या
  • वजन ज्यादा
  • अभी रिसर्च स्टेज पर
  • महंगा और लिमिटेड प्रोडक्शन
Moya Robot vs Protocol One Alpha कौन सा Humanoid Robot ज्यादा एडवांस्ड है पूरी तुलना (2026)

मैकेनिकल इंजीनियरिंग की नजर से निष्कर्ष

मोया (Moya) – प्रैक्टिकल और रिलायबल: इलेक्ट्रिक सर्वो मोटर्स और टेंडन सिस्टम के कारण यह हल्का, कम मेंटेनेंस वाला और सुरक्षित है। सोशल, हेल्थकेयर और कमर्शियल इस्तेमाल के लिए यह आज के समय में अधिक बेहतर और व्यावहारिक विकल्प है।

क्लोन अल्फा (Clone Alpha) – एंबिशस और फ्यूचरिस्टिक: पानी से चलने वाला मायोफाइबर सिस्टम इंसान की मांसपेशियों और 206 हड्डियों की सटीक नकल करता है। यह तकनीक रिसर्च और भविष्य के बायोमिमेटिक रोबोट्स के लिए क्रांतिकारी है, हालांकि अधिक कॉम्प्लेक्सिटी के कारण कमर्शियल उपयोग में अभी चुनौतियाँ हैं।

अंतिम राय (Final Takeaway): मोया दिखाता है कि रोबोट को आज इंसान के बीच सुरक्षित और व्यावहारिक कैसे बनाया जाए, जबकि क्लोन अल्फा भविष्य की एडवांस्ड ह्यूमन रोबोटिक्स की दिशा तय कर रहा है। भविष्य में इन दोनों तकनीकों का मेल एक बेहद रियलिस्टिक और प्रैक्टिकल ह्यूमनॉइड रोबोट बना सकता है।

अमल कुमार
मैकेनिकल इंजीनियर
AKTU लखनऊ (2025)

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